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| पतझड़ में पत्ते गिरैं, मन आकुल हो जाय। गिरा हुआ पत्ता कभी, फ़िर वापस ना आय।। ~ अनुराग शर्मा हर शनिवार को आवाज़ पर सुनें एक नयी कहानी "दफ्तर के साथी शाम को हाइवे पर एक चाय भजिया के ठेले पर बैठ कर अड्डेबाजी करते थे।" (अनुराग शर्मा की "नसीब अपना अपना" से एक अंश) |
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#113rd Story, Naseeb Apna Apna: Anurag Sharma/Hindi Audio Book/2010/45. Voice: Anurag Sharma
बहुत अच्छी कहानी है, पहले पढ़ भी चुका हूं..
ReplyDeleteधन्यवाद!
ReplyDeleteindian citizen aur smart indian ka comment achha hai
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