रेडियो प्लेबैक वार्षिक टॉप टेन - क्रिसमस और नव वर्ष की शुभकामनाओं सहित


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प्लेबैक की टीम और श्रोताओं द्वारा चुने गए वर्ष के टॉप १० गीतों को सुनिए एक के बाद एक. इन गीतों के आलावा भी कुछ गीतों का जिक्र जरूरी है, जो इन टॉप १० गीतों को जबरदस्त टक्कर देने में कामियाब रहे. ये हैं - "धिन का चिका (रेड्डी)", "ऊह ला ला (द डर्टी पिक्चर)", "छम्मक छल्लो (आर ए वन)", "हर घर के कोने में (मेमोरीस इन मार्च)", "चढा दे रंग (यमला पगला दीवाना)", "बोझिल से (आई ऍम)", "लाईफ बहुत सिंपल है (स्टैनले का डब्बा)", और "फकीरा (साउंड ट्रेक)". इन सभी गीतों के रचनाकारों को भी प्लेबैक इंडिया की बधाईयां

Wednesday, October 12, 2011

जाने क्या है जी डरता है...असम के चाय के बागानों से आती एक हौन्टिंग पुकार



ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 764/2011/204

सम के लोक-संगीत की बात चल रही हो और चाय बागानों के संगीत की चर्चा न हो, यह सम्भव नहीं। 'ओल्ड इज़ गोल्ड' के दोस्तों, नमस्कार, और स्वागत है शृंखला 'पुरवाई' में जिसमें इन दिनों आप पूर्व और उत्तर-पूर्व भारत के लोक धुनों पर आधारित हिन्दी फ़िल्मी गीत सुन रहे हैं। चाय बागानों की अपनी अलग संस्कृति होती है, अपना अलग रहन-सहन, गीत-संगीत होता है। दरअसल इन चाय बागानों में काम करने वाले मज़दूर असम, बंगाल, बिहार और नेपाल के रहने वाले हैं और इन सब की भाषाओं के मिश्रण से एक नई भाषा का विकास हुआ जिसे चाय बागान की भाषा कहा जाता है। यह न तो असमीया है, न ही बंगला, न नेपाली है और न ही हिन्दी। इन चारों भाषाओं की खिचड़ी लगती है सुनने में, पर इसका स्वाद जो है वह खिचड़ी जैसा ही स्वादिष्ट है। यहाँ का संगीत भी बेहद मधुर और कर्णप्रिय होता है। असम के चाय बागानों में झुमुर नृत्य का चलन है। यह नृत्य लड़कों और लड़कियों द्वारा एक साथ किया जाता है, और कभी-कभी केवल लड़कियाँ करती हैं झुमुर नृत्य। इस नृत्य में पाँव के स्टेप्स का बहुत महत्व होता है, एक क़दम ग़लत पड़ा और नृत्य बिगड़ जाए। ऐसा इसलिए क्योंकि नृत्य करने वाले एक दूसरे की कमर को कस के पकड़े हुए होते हैं। और इस नृत्य के दौरान बजने वाला गीत-संगीत नृत्य को और भी ज़्यादा सुनद्र बना देते हैं। एक अजीब सुकून देने वाला यह संगीत है। आज के बड़े शहरों की तनाव से भरी ज़िन्दगी जीने वालों के लिए यह सुझाव देना चाहेंगे कि एक बार असम या उत्तर बंगाल के चाय बागानों की सैर कर आइए, यकीन दिलाते हैं कि आप एक नई ताज़गी और स्फूर्ति से भर उठेंगे। शायद वैसी ही ताज़गी जो यहाँ के चाय पत्तियों से बनी चाय की चुस्की लेते हुए आप महसूस करते हैं।

आज के अंक के लिए असम के चाय बागान के संगीत पर आधारित हमनें जिस गीत को चुना है, उसे भी कल की तरह भूपेन हज़ारिका नें ही स्वरबद्ध किया है। फ़िल्म 'एक पल' का यह गीत है "जाने क्या है जी डरता है, रो देने को जी करता है, अपने आप से डर लगता है, डर लगता है, क्या होगा"। लता मंगेशकर की आवाज़ है और गुलज़ार के बोल। यह १९८६ की कल्पना लाजमी निर्देशित फ़िल्म थी जो असम की पृष्ठभूमि पर बनी फ़िल्म थी। फ़िल्म के सभी गीतों में असमीया संगीत साफ़ सुनाई देता है, फिर चाहे आज का यह गीत हो या "मैं तो संग जाऊँ बनवास", विदाई गीत "ज़रा धीरे ज़रा धीमे" हो या फिर "फूले दाना दाना"। आज जो गीत आपको सुनवा रहे हैं, इसका असमीया गीत हम 'ओल्ड इज़ गोल्ड शनिवार विशेष' के उषा मंगेशकर पर केन्द्रित अंक में सुनवा चुके हैं। याद है न "राधाचुड़ार फूल गूंजी राधापुरोर राधिका" गीत? यह एक झुमुर नृत्य शैली का लोक गीत है जिस पर आधारित यह असमीया गीत है। पर हिन्दी वर्ज़न में भूपेन हज़ारिका नें बीट्स कम कर के इसमें एक हौन्टिंग् टच ले आये हैं। गीत सुन कर वाक़ई ऐसा लगता है कि कोई डरा हुआ है। तो आइए आज असम के चाय बगानों की सैर की जाये लता मंगेशकर, भूपेन हज़ारिका और गुलज़ार के साथ फ़िल्म 'एक पल' के इस गीत के माध्यम से।



चलिए आज से खेलते हैं एक "गेस गेम" यानी सिर्फ एक हिंट मिलेगा, आपने अंदाजा लगाना है उसी एक हिंट से अगले गीत का. जाहिर है एक हिंट वाले कई गीत हो सकते हैं, तो यहाँ आपका ज्ञान और भाग्य दोनों की आजमाईश है, और हाँ एक आई डी से आप जितने चाहें "गेस" मार सकते हैं - आज का हिंट है -
काका बाबु और किम पर फिल्मांकित इस गीत का आरंभ होता है इस शब्द से -"संग"

पिछले अंक में
लगता है की अब सभी श्रोता हमारे इशारों में बात करते हैं :) सुजॉय की पुरवाई का असर है
खोज व आलेख- सुजॉय चट्टर्जी


इन्टरनेट पर अब तक की सबसे लंबी और सबसे सफल ये शृंखला पार कर चुकी है ५०० एपिसोडों लंबा सफर. इस सफर के कुछ यादगार पड़ावों को जानिये इस फ्लेशबैक एपिसोड में. हम ओल्ड इस गोल्ड के इस अनुभव को प्रिंट और ऑडियो फॉर्मेट में बदलकर अधिक से अधिक श्रोताओं तक पहुंचाना चाहते हैं. इस अभियान में आप रचनात्मक और आर्थिक सहयोग देकर हमारी मदद कर सकते हैं. पुराने, सुमधुर, गोल्ड गीतों के वो साथी जो इस मुहीम में हमारा साथ देना चाहें हमें oig@hindyugm.com पर संपर्क कर सकते हैं या कॉल करें 09871123997 (सजीव सारथी) या 09878034427 (सुजॉय चटर्जी) को

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3 श्रोताओं का कहना है :

अमित तिवारी का कहना है कि -

चलिए मैंने तो ढूंढ ही लिया किम के साजन यानी कि काका को.लाल रंग की टोपी जम रही है काका के ऊपर और हाँ पंचम दा का संगीतबद्ध करा हुआ एक रेयर गाना जो है ये.

indu puri का कहना है कि -

फिल्म -फिर वो ही रात
संगीतकार- आर डी .बर्मन
गीतकार-मजरूह सुल्तानपुरी
गाना- "संग मेरे निकले थे साजन '
गायक गायिका -किशोर-लाता-कोरस
अमितजी थेंक्स आपका हिंट काम कर गया और....गूगल बाबाजी की मदद भी वरना मुझे इसका उत्तर नही मालूम हा हा हा
चीटिंग की है जी.क्या करूं?ऐसिच हूँ मैं तो -चोट्टी

अमित तिवारी का कहना है कि -

इंदू जी अब तो आप पार्टी डे ही दीजिए. आपको उत्तर जो मालूम चला चाहे जैसे भी. :)

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