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प्लेबैक की टीम और श्रोताओं द्वारा चुने गए वर्ष के टॉप १० गीतों को सुनिए एक के बाद एक. इन गीतों के आलावा भी कुछ गीतों का जिक्र जरूरी है, जो इन टॉप १० गीतों को जबरदस्त टक्कर देने में कामियाब रहे. ये हैं - "धिन का चिका (रेड्डी)", "ऊह ला ला (द डर्टी पिक्चर)", "छम्मक छल्लो (आर ए वन)", "हर घर के कोने में (मेमोरीस इन मार्च)", "चढा दे रंग (यमला पगला दीवाना)", "बोझिल से (आई ऍम)", "लाईफ बहुत सिंपल है (स्टैनले का डब्बा)", और "फकीरा (साउंड ट्रेक)". इन सभी गीतों के रचनाकारों को भी प्लेबैक इंडिया की बधाईयां

Monday, March 17, 2008

तितली परी (Titali Pari)



आज से हिन्द-युग्म अपने आवाज़-मंच पर एक नई शुरूआत कर रहा है। अभी तक हम कहानियों का पॉडकास्ट, कविताओं का पॉडकास्ट, संगीतबद्ध गीतों का पॉडकास्ट प्रकाशित करता रहा था। लेकिन इस बार हम बाल साहित्य का पॉडकास्ट आरम्भ कर रहे हैं। बाल-उद्यान पर प्रकाशित बाल-रचनाओं (कविता, कहानी, ज्ञानवर्धक लेख आदि) को एक-एक करके नियमित रूप से मीनाक्षी 'मीनू' अपनी आवाज़ देंगी।

आज हम बच्चों के लिए पहले पॉडकास्ट के रूप में कवि कुलवंत सिंह की कविता 'तितली परी' का पॉडकास्ट लेकर आये हैं। मीनाक्षी 'मीनू' और हिन्द-युग्म का यह प्रयास आपको कितना पसंद आया, यह तो आपकी प्रतिक्रियाओं से पता चलेगा।

नीचे ले प्लेयर से सुनें.

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यदि आप इस पॉडकास्ट को नहीं सुन पा रहे हैं तो नीचे दिये गये लिंकों से डाऊनलोड कर लें (ऑडियो फ़ाइल तीन अलग-अलग फ़ॉरमेट में है, अपनी सुविधानुसार कोई एक फ़ॉरमेट चुनें)

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16 श्रोताओं का कहना है :

seema sachdeva का कहना है कि -

titali pari kavita padhane me jitani achchi lagi utani hi sunane me bhi , vaise isme geyata ka gun bhi hai agar ise lay se gaaya jaata to aur achcha lagata .fir bhi yah paratham pryaas bahut achcha laga.badhaai.....seema sachdev

Sanjeet Tripathi का कहना है कि -

पसंद आया!!

तपन शर्मा का कहना है कि -

मीनाक्षी जी, ये काम बहुत अच्छा हो गया है। कईं बच्चे जो छोटे हैं इसलिये पढ़ नहीं पाते, उनके लिये इस तरह से आवाज़ के माध्यम से कविता का पाठ निश्चित ही उन्हें उत्साहित करेगा। और ये प्रयोग उनमें सुनने के प्रति ध्यान केंद्रित करना भी सिखायेगा। विद्यालयों में भी इसका प्रयोग किया जा सकता है। हो सकता है कि युग्म के माध्यम से ही तरह तरह की कवितायें स्कूलों तक पहुँच जायें या फिर आकाशवाणी पर बच्चों के कार्यक्रमों में। सुनीता जी, आप इस विषय में अपने विचार दें।

Divya Prakash का कहना है कि -

बहुत अच्छा मीनाक्षीजी , जिस लहजे मैं आपने कविता सुनाई उससे ऐसा लगा की फ़िर से बच्चे हो जाएं | बहुत ही सराहनीय प्रयास है और "तपन जी " ने सही कहा इस तरह के प्रयोग आज की शिक्षा मैं बहुत जरुरी हो गए हैं | उम्मीद करता हूँ आगे भी आपकी आवाज़ यूं ही नई कवितायेँ कहती रहेगी | वैसे भी बच्चो के साहित्य के नाम पर अभी भी हमें पंचतंत्र और कुछ पुरानी कहानिया ही यद् आती है ,इस तरह हम नए साहित्य को नई दिशा देने की तरफ़ कदम बढ़ा रहे हैं ....कुलवंत जी को भी बहुत बहुत साधुवाद
दिव्य प्रकाश

सजीव सारथी का कहना है कि -

आपकी आवाज़ बहुत अच्छी है मीनाक्षी जी, बच्चों को बहुत भाएगी, कुलवंत जी की रचना भी मधुर है, एक अच्छी शुरुवात, बहुत बहुत शुभकामनाएं

रंजना [रंजू भाटिया] का कहना है कि -

यह तो बहुत ही सुंदर कोशिश है ..बच्चे इस माध्यम से जल्दी किसी भी चीज को सीख जाते हैं ..बहुत ही सुंदर और काबिले तारीफ प्रयास है यह ...कुलवंत जी की कविता और मीनाक्षी जी की आवाज़ दोनों ही बहुत पसन्द आए ..आगे के लिए ढेर सारी शुभकामनाएं और बधाई !!

रंजू

करण समस्तीपुरी का कहना है कि -

इस शानदार प्रस्तुति के लिए कवि कुलवंत, मीनू जी और हिंद युग्म के समेकित प्रयास को सदर नमन ! शब्दों की समीक्षा तो पहले ही हो चुकी है, यहाँ सर्वाधिक प्रशंश्नीय है, कविता की प्रकृति के अनुरूप मीनू जी की बाल सुलभ आवाज़. छंद में कहीं कहीं खिचाव और कहीं संकुचन है किंतु कलकंठी स्वरदात्री ने अपने सुमधुर स्वर से इस कमी का सम्यक निर्वाह करते हुए इस प्रस्तुति को सहज ही मनोरम बना दिया है ! हिंद युग्म का यह प्रयास वस्तुतः सराहनीय है क्योंकि बच्चों के लिए यह बहुत जरूरी था ! सधन्यवाद !

anuradha srivastav का कहना है कि -

अच्छा प्रयास ..........

अल्पना वर्मा का कहना है कि -

achchha prayaas.
badhayee.

अल्पना वर्मा का कहना है कि -

sorry for writing in english--

Meenu ji ,sorry to criticise few points--
-please correct pronounciation of urdu word-gham --which u say 'gam''in recited poem.

and in the end you were sounding like trying to finish poem fast.

sach kahun it was sounding just like a --teacher reading a poem in a class.
--childrens poems recitation need to be more interactive and friendly----very sorry to comment but these are my views.

Meenakshi का कहना है कि -

हिन्द-युग्म में पहले प्रयास को सराहने के लिए आप सबका धन्यवाद. मैने उसी अन्दाज़ में ही बोलना चाहा जिस अन्दाज़ में बच्चों को हिन्दी कविता की प्रतियोगिता के लिए सहायता चाहिए होती है
13 साल के अध्यापन का अनुभव बच्चों के पास क्लास रूम में पहुँचा ही देता है.
जहाँ तक उच्चारण की बात है..ग़म , क़रार जैसे शब्द न बोल पाने के कारण अपनी फारसी उस्ताद से भी डाँट खाती हूँ. हाँ जलील भाई को ज़लील कभी नहीं पुकारा. :)

anju का कहना है कि -

बहुत ही अच्छा प्रयास
मधुर आवाज़
बच्चे उत्साहित होंगे
बहुत बहुत बधाई

अल्पना वर्मा का कहना है कि -

Meenakshi ji bahut achcha laga ki aapne meri tippani ko sakaratmak liya.
dhnywaad.

devendra kumar mishra का कहना है कि -

बहुत ही सुंदर !

शैलेश भारतवासी का कहना है कि -

मीनाक्षी जी,

सर्वप्रथम आपका हिन्द-युग्म परिवार में स्वागत। हम बच्चे आपकी आवाज़ पाकर बहुत खुश हैं। और आगे भी आपकी आवाज़ में कविताएँ, कहानियाँ, रोचक-प्रसंग सुनना चाहेंगे।

अल्पना जी कि यह बात ठीक है कि मीनू जी 'सडेन डेथ' जैसा अंत कर दिया है।

sahil का कहना है कि -

सुंदर
आलोक सिंह "साहील"

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