रेडियो प्लेबैक वार्षिक टॉप टेन - क्रिसमस और नव वर्ष की शुभकामनाओं सहित


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प्लेबैक की टीम और श्रोताओं द्वारा चुने गए वर्ष के टॉप १० गीतों को सुनिए एक के बाद एक. इन गीतों के आलावा भी कुछ गीतों का जिक्र जरूरी है, जो इन टॉप १० गीतों को जबरदस्त टक्कर देने में कामियाब रहे. ये हैं - "धिन का चिका (रेड्डी)", "ऊह ला ला (द डर्टी पिक्चर)", "छम्मक छल्लो (आर ए वन)", "हर घर के कोने में (मेमोरीस इन मार्च)", "चढा दे रंग (यमला पगला दीवाना)", "बोझिल से (आई ऍम)", "लाईफ बहुत सिंपल है (स्टैनले का डब्बा)", और "फकीरा (साउंड ट्रेक)". इन सभी गीतों के रचनाकारों को भी प्लेबैक इंडिया की बधाईयां

Monday, July 18, 2011

सावन के बादलों उनसे जा कहो...रिमझिम फुहारों के बीच विरह के दर्द में भींगे जोहरा बाई और करण दीवान के स्वर



ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 702/2011/142

"ओश्रृंखला "उमड़ घुमड़ कर आई रे घटा" की दूसरी कड़ी में आपका पुनः स्वागत है| कल की कड़ी में आपने वर्षा ऋतु के आगमन की सार्थक अनुभूति कराने वाले राग "मेघ मल्हार" पर आधारित गीत का रसास्वादन किया था| आज हम जिस वर्षाकालीन राग और उस पर आधारित फ़िल्मी गीत सुनने जा रहे हैं, वह "मल्हार" के किसी प्रकार के अन्तर्गत नहीं आता; बल्कि "सारंग" के अन्तर्गत आता है| परन्तु इसका स्वर संयोजन ऐसा है कि इसके गायन-वादन से वर्षाकालीन परिवेश सहज रूप में उपस्थित हो जाता है| दोस्तों, आज का राग है- "वृन्दावनी सारंग"| कल के अंक में हम यह चर्चा कर चुके हैं कि मल्हार अंग के रागों के अलावा "वृन्दावनी सारंग", "देस" और "जयजयवन्ती" भी ऐसे राग हैं; जो स्वतंत्र रूप से और "मल्हार" के मेल से भी वर्षा ऋतु के परिवेश की सृष्टि करने में सक्षम हैं| मल्हार के मिश्र रागों पर आधारित गीत हम आपको श्रृंखला की अगली कड़ियों में सुनवाएँगे; परन्तु आज हम आपको राग "वृन्दावनी सारंग" का संक्षिप्त परिचय और उस पर आधारित एक विरह गीत सुनवाने जा रहे हैं|

यह राग वर्षा ऋतु में नायक-नायिका के विरह भाव को उत्प्रेरित करता है| राग "मेघ मल्हार" की तरह "वृन्दावनी सारंग" भी गान्धार और धैवत रहित औडव-औडव जाति का राग है तथा शुद्ध और कोमल- दोनों निषाद का प्रयोग किया जाता है| शेष सभी स्वर शुद्ध होते हैं| राग "वृन्दावनी सारंग" में ऋषभ पर आन्दोलन ना करने से यह "मेघ मल्हार" से अलग हो जाता है| गम्भीर प्रकृति का राग होने के कारण यह श्रृंगार रस के विरह पक्ष को उभारता है| राग की प्रकृति के एकदम अनुकूल रीतिकालीन सूफी कवि मलिक मुहम्मद जायसी की यह पंक्तियाँ हैं, जिसमें रानी नागमती का विरह वर्णन है-

चढ़ा असाढ़ गगन घन गाजा, साजा बिरह दुन्द दल बाजा |
सावन बरस मेंह अतवानी, मरन परी हौं बिरह झुरानी |

आज का गीत भी नायक-नायिका के बीच की दूरी और विरह भाव को व्यक्त करता है| 1944 में प्रदर्शित फिल्म "रतन" के लिए संगीतकार नौशाद ने दीनानाथ मधोक के गीत को राग "वृन्दावनी सारंग" पर आधारित संगीतबद्ध किया था| इस गीत को अपने समय की चर्चित गायिका जोहरा बाई और गायक-अभिनेता करण दीवान ने युगल गीत के रूप में गाया है| फिल्मांकन में नायक-नायिका के बीच परस्पर दूरी है और वे आकाश में छाए बादलों को लक्ष्य करके अपनी-अपनी विरह व्यथा को व्यक्त करते हैं| उस समय तक नौशाद द्वारा संगीतबद्ध किये गए फिल्मों में "रतन" सर्वाधिक सफल फिल्म थी| इस फिल्म के संगीत की सफलता आकलन इस तथ्य से ही किया जा सकता है कि फिल्म की निगेटिव का मूल्य पचहत्तर हजार रुपए था; जबकि गीतों की रायल्टी साढ़े तीन लाख रुपए आई थी| रायल्टी की इस राशि ने उस समय तक के सारे कीर्तिमान ध्वस्त कर दिए थे| यही नहीं फिल्म "रतन" के गीतों के कारण ही गायिका जोहरा बाई चोटी की गायिका बन गईं थीं| आप सुनिए राग "वृन्दावनी सारंग" पर आधारित यह गीत और मुझे आज यहीं विराम लेने की अनुमति दीजिये, कल के नए अंक में, एक नए राग और एक नए गीत के साथ आपसे फिर मिलूँगा|



क्या आप जानते हैं...
कि फिल्म "रतन" की संगीत रचना के लिए संगीतकार नौशाद को 50 रुपए प्रति गीत के हिसाब से कुल 800 रुपए मानदेय प्राप्त हुआ था|

आज के अंक से पहली लौट रही है अपने सबसे पुराने रूप में, यानी अगले गीत को पहचानने के लिए हम आपको देंगें ३ सूत्र जिनके आधार पर आपको सही जवाब देना है-

सूत्र १ - संगीतकार के अभिन्न मित्र थे फिल्म के निर्माता गायक.
सूत्र २ - स्वर है लता जी का.
सूत्र ३ - मुखड़े में शब्द है - "गरवा"

अब बताएं -
किस वर्षा के राग की ताल पर स्वरबद्ध रचना है ये - ३ अंक
फिल्म के निर्माता का नाम बताएं - २ अंक
संगीतकार कौन हैं - २ अंक

सभी जवाब आ जाने की स्तिथि में भी जो श्रोता प्रस्तुत गीत पर अपने इनपुट्स रखेंगें उन्हें १ अंक दिया जायेगा, ताकि आने वाली कड़ियों के लिए उनके पास मौके सुरक्षित रहें. आप चाहें तो प्रस्तुत गीत से जुड़ा अपना कोई संस्मरण भी पेश कर सकते हैं.

पिछली पहेली का परिणाम -
क्षिति जी ने एक बार फिर शानदार शुरुआत की है. अमित जी और अविनाश जी ने २ -२ अंक बटोरे. कल के सभी टिप्पणीकारों को हम १-१ अंक दे रहे हैं, पर याद रहे आज से ये १ अंक किसी रचनात्मक टिपण्णी के ही मिलेंगें, गलत जवाब देने पर नहीं.

खोज व आलेख- कृष्ण मोहन मिश्र



इन्टरनेट पर अब तक की सबसे लंबी और सबसे सफल ये शृंखला पार कर चुकी है ५०० एपिसोडों लंबा सफर. इस सफर के कुछ यादगार पड़ावों को जानिये इस फ्लेशबैक एपिसोड में. हम ओल्ड इस गोल्ड के इस अनुभव को प्रिंट और ऑडियो फॉर्मेट में बदलकर अधिक से अधिक श्रोताओं तक पहुंचाना चाहते हैं. इस अभियान में आप रचनात्मक और आर्थिक सहयोग देकर हमारी मदद कर सकते हैं. पुराने, सुमधुर, गोल्ड गीतों के वो साथी जो इस मुहीम में हमारा साथ देना चाहें हमें oig@hindyugm.com पर संपर्क कर सकते हैं या कॉल करें 09871123997 (सजीव सारथी) या 09878034427 (सुजॉय चटर्जी) को

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11 श्रोताओं का कहना है :

अमित तिवारी का कहना है कि -

Malhar

Prateek Aggarwal का कहना है कि -

Goud Malhar

Avinash Raj का कहना है कि -

Music is by Roshan

शरद तैलंग का कहना है कि -

nirmata : Mukesh

Hindustani का कहना है कि -

is gaane ki dhun par ek aur gaana bana jo jyada hit hua.'Garjat Barsat Sawan Aayo Re', film Barsat ki raat se jise 'Kamal Barot Aur Suman Kalyanpur' ne gaya tha. dono hee gaano ka sangeet 'Roshan' ka Diya tha.

Aaj ka Gana hai 'Garjat Barsat Bhhejat'

शरद तैलंग का कहना है कि -

आपने राग पूछा है या ताल

Kshiti का कहना है कि -

raag gaud malhar teen taal ka chota khyal hai.

AVADH का कहना है कि -

मैं समझता हूँ कि शरद जी और अविनाश जी तो प्रश्न २ और ३ का सही उत्तर दे ही चुके हैं.प्रतीक जी ने प्रश्न १ का सही उत्तर सबसे पहले दिया जिसमें क्षिति जी ने और आगे जोड़ा.
शायद अमित जी ने राग नहीं फिल्म का नाम बताया है'मल्हार' जो सही लगता है.
इस फिल्म के मुकेश जी द्वारा कई लोकप्रिय गीत हैं: दिल तुझे दिया था रखने को; और लता दीदी के साथ युगल- बड़े अरमान से रखा है सनम आदि.
हिन्दुस्तानी जी ने गीत से सम्बंधित और जानकारी दी. तो अब मैं गीत का पूरा मुखड़ा बताने की धृष्टता कर रहा हूँ.
"गरजत बरसात भीजत आईलो, तुम्हरे मिलन को अपने प्रेम पिहरवा. लो गरवा लगाये."
अवध लाल

अमित तिवारी का कहना है कि -

अवध जी मैंने तो राग का नाम ही 'मल्हार' बताया है जो फिल्म का भी नाम है . फिल्म का नाम तो पूछा ही नहीं गया.

अमित तिवारी का कहना है कि -

Raag Malhar is Main Raga which is also called Shuddha Malhar.
Three major time periods are identified in the development of the Malhars: prAchina (before the 15th C), madhyakAlina (15th C - 18th C) and avArchina (19th C to the present).

Raga Malhar: Shuddha Malhar

PrAchina: Megh, Megh Malhar
Gaud Malhar

MadhyakAlina: Miyan Malhar
Soor Malhar
Ramdasi Malhar
Nat Malhar
Mirabai ki Malhar
Dhulia Malhar
Gaudgiri Malhar
Charju ki Malhar
Jayant Malhar

AvArchina: Samant Malhar
Chanchalsas Malhar
Arun Malhar
Roopmanjari Malhar
Chhaya Malhar
Tilak Malhar
Sorath Malhar
Des Malhar
Sveta Malhar
Nayaki Malhar
Kedar Malhar
Jhanjh Malhar
Chandra Malhar

Nava-nirmita:
Mahendra Malhar
Anjani Malhar
Janaki Malhar

Ye Saari Jankaaree mujhe Dr. Geeta Banarjee dwara likhi pustak 'RAAG MALHAR DARSHAN' se mili hai.

भारतीय नागरिक - Indian Citizen का कहना है कि -

बेहद शानदार गीत..

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