रेडियो प्लेबैक वार्षिक टॉप टेन - क्रिसमस और नव वर्ष की शुभकामनाओं सहित


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प्लेबैक की टीम और श्रोताओं द्वारा चुने गए वर्ष के टॉप १० गीतों को सुनिए एक के बाद एक. इन गीतों के आलावा भी कुछ गीतों का जिक्र जरूरी है, जो इन टॉप १० गीतों को जबरदस्त टक्कर देने में कामियाब रहे. ये हैं - "धिन का चिका (रेड्डी)", "ऊह ला ला (द डर्टी पिक्चर)", "छम्मक छल्लो (आर ए वन)", "हर घर के कोने में (मेमोरीस इन मार्च)", "चढा दे रंग (यमला पगला दीवाना)", "बोझिल से (आई ऍम)", "लाईफ बहुत सिंपल है (स्टैनले का डब्बा)", और "फकीरा (साउंड ट्रेक)". इन सभी गीतों के रचनाकारों को भी प्लेबैक इंडिया की बधाईयां

Thursday, April 1, 2010

उड़न खटोले पर उड़ जाऊं.....बचपन के प्यार को अभिव्यक्त करता एक खूबसूरत युगल गीत



ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 391/2010/91

युगल गीतों की जब हम बात करते हैं, तो साधारणत: हमारा इशारा पुरुष-महिला युगल गीतों की तरफ़ ही होता है। मेरा मतलब है वो युगल गीत जिनमें एक आवाज़ गायक की है और दूसरी आवाज़ किसी गायिका की। लेकिन जब भी युगल गीतों में ऐसे मौके आए हैं कि जिनमें दोनों आवाज़ें या तो पुरुष हैं या फिर दोनों महिला स्वर हैं, ऐसे में ये गानें कुछ अलग हट के, या युं कहें कि ख़ास बन जाते हैं। आज से हम 'ओल्ड इज़ गोल्ड' पर शुरु कर रहे हैं पार्श्वगायिकाओं के गाए हुए युगल गीतों, यानी कि 'फ़ीमेल डुएट्स' पर आधारित हमारी लघु शृंखला 'सखी सहेली'। इस शूंखला में हम १० फ़ीमेल डुएट्स सुनेंगे, यानी कि १० अलग अलग गायिकाओं की जोड़ी के गाए गीतों का आनंद हम उठा सकेंगे। ४० से लेकर ७० के दशक तक की ये जोड़ियाँ हैं जिन्हे हम शामिल कर रहे हैं, और हमारा विश्वास है कि इन सुमधुर गीतों का आप खुले दिल से स्वागत करेंगे। तो आइए शुरुआत की जाए इस शूंखला की। पहली जोड़ी के रूप में हमने एक ऐसी जोड़ी को चुना है जिनमें आवाज़ें दो ऐसी गायिकाओं की हैं जो ४० और ५० के दशकों में अपनी वज़नदार और नैज़ल आवाज़ों की वजह से जाने जाते रहे। ४० का दशक इस तरह की वज़नदार आवाज़ों का दशक था और उस दशक में कई इस तरह की आवाजें सुनाई दीं। तो साहब, आज जिन दो आवाज़ों को हम आज शामिल कर रहे हैं वो हैं ज़ोहराबाई अम्बालेवाली और शमशाद बेग़म। युं तो इन दोनों ने साथ साथ कई युगल गीत गाए हैं, लेकिन मेरे ख़याल से इस जोड़ी का जो सब से मशहूर गीत रहा है वह है फ़िल्म 'अनमोल घड़ी' का, और जिसके बोल हैं "उड़न खटोले पे उड़ जाऊँ, तेरे हाथ ना आऊँ"। दो बाल कलाकारों पर फ़िल्माया हुआ यह गाना है। १९४६ की यह फ़िल्म, तनवीर नक़वी का गीत और नौशाद अली का संगीत। युं तो इस फ़िल्म के दो और गीत हम आप तक 'ओल्ड इज़ गोल्ड' में पहुँचा चुके हैं, और फ़िल्म की तमाम बातें भी कह चुके हैं, इसलिए क्यों ना आज कुछ और बातें की जाए!

पार्श्वगायिकाओं की इस जोड़ी की अगर हम बात करें तो शम्शाद बेग़म जी के बारे में तो आप सभी को तमाम बातें मालूम होंगी, लेकिन बहुत कम ही ऐसे लोग होंगे जिन्हे ज़ोहराबाई अम्बालेवाली के बारे में अधिक जानकारी हो। इसलिए हमने सोचा कि क्यों ना आज के इस अंक के बहाने हम ज़ोहराबाई से आपका परिचय करवाएँ! 'ज़ोहरा जान ऒफ़ अम्बाला' नाम से सन् १९३७-३८ में ऒल इण्डिया रेडियो के दिल्ली, लाहौर, पेशावर केन्द्रों से गायन जीवन प्रारम्भ करने वाली ज़ोहराबाई से सन् १९३८ में संगीतकार अनिल बिस्वास ने सब से पहले सागर मूवीटोन कृत 'ग्रामोफ़ोन सिंगर' फ़िल्म के लिए गीत गवाया था। उसके बाद 'हम तुम और वह ('३८), 'बहूरानी' ('४०), 'हिम्मत' ('४१), 'रिटर्ण ऒफ़ तूफ़ान मेल' ('४२), 'तलाश' ('४३), 'विजयलक्ष्मी' ('४३) आदि फ़िल्मों में गीत गाए, लेकिन उन्हे असली कामयाबी जिस फ़िल्म से मिली, वह फ़िल्म थी 'रतन'। इस फ़िल्म का "अखियाँ मिलाके जिया भरमाके" गीत सब से ज़्यादा कामयाब रहा, जिसे हमने आपको इसी महफ़िल में भी सुनवाया था। नौशाद साहब ने 'रतन' के बाद भी अपनी कई फ़िल्मों में ज़ोहराबाई से गानें गवाए जैसे कि 'जीवन' ('४४), 'पहले आप' ('४४), 'सन्यासी' ('४५), 'अनमोल घड़ी' ('४६), 'एलान' ('४७), 'नाटक' ('४७) और 'मेला' ('४८)। हरमंदिर सिंह 'हमराज़' के प्रसिद्ध 'गीत कोश' के मुताबिक ज़ोहराबाई ने ४० के दशक में कुल १२२९ गीत गाए हैं। इस दशक के अधिकाँश ग्रामोफ़ोन रिकार्ड्स पर गीत गाने वाले पार्श्वगायकों के सही दिए जाने के बजाए पात्र का नाम दिए जाने की प्रथा लागू थी। अत: अनुमान है कि ज़ोहराबाई ने लगभग १५०० गीत गाए होंगे। उनके गाए गीतों की अनुमानित संख्या उन सभी पार्श्वगायिकाओं के गाए गीतों से अधिक हैं जो उस समय मशहूर थीं। दोस्तों, ये तमाम जानकारियाँ हमने बटोरी है 'लिस्नर्स बुलेटिन' अंक ८१ से, जो प्रकाशित हुआ था मई १९९० में। आप को यह भी बता दें कि ज़ोहराबी का २१ फ़रवरी १९९० को ६८ वर्ष की आयु में बम्बई में निधन हो गया था। तो चलिए दोस्तों, ज़ोहराबाई और शमशाद बेग़म के साथ साथ हम भी उड़न खटोले की सैर पे निकलते हैं और सुनते हैं यह यादगार गीत जो हमें याद दिलाती है उस पुराने दौर की जब ऐसी वज़नदार और नैज़ल आवाज़ वाली गायिकाओं का राज था।



क्या आप जानते हैं...
कि १९५३ की फ़िल्म 'तीन बत्ती चार रास्ते' के एक सहगान में जब ज़ोहराबाई अम्बालेवाली को केवल एकाध लाइन गाने का अवसर दिया गया तो उन्होने फ़िल्म जगत से सन्यास लेने में ही भलाई समझी।

चलिए अब बूझिये ये पहेली, और हमें बताईये कि कौन सा है ओल्ड इस गोल्ड का अगला गीत. हम आपसे पूछेंगें ४ सवाल जिनमें कहीं कुछ ऐसे सूत्र भी होंगें जिनसे आप उस गीत तक पहुँच सकते हैं. हर सही जवाब के आपको कितने अंक मिलेंगें तो सवाल के आगे लिखा होगा. मगर याद रखिये एक व्यक्ति केवल एक ही सवाल का जवाब दे सकता है, यदि आपने एक से अधिक जवाब दिए तो आपको कोई अंक नहीं मिलेगा. तो लीजिए ये रहे आज के सवाल-

1. मुखड़े में शब्द है -"चाँद", गीत बताएं -३ अंक.
2. दो गायिकाओं ने जिन्होंने इस गीत को गाया है सुरैया और _____, बताएं कौन हैं ये- २ अंक.
3. ए आर कारदार निर्देशित इस फिल्म का नाम बताएं-२ अंक.
4. नौशाब साहब का था संगीत, गीतकार बताएं-२ अंक.

विशेष सूचना -'ओल्ड इज़ गोल्ड' शृंखला के बारे में आप अपने विचार, अपने सुझाव, अपनी फ़रमाइशें, अपनी शिकायतें, टिप्पणी के अलावा 'ओल्ड इज़ गोल्ड' के नए ई-मेल पते oig@hindyugm.com पर ज़रूर लिख भेजें।

पिछली पहेली का परिणाम-
शरद जी, पाबला जी, इंदु जी, और पदम् जी को बधाई.....अवध जी आपका अंदाजा एकदम सही है

खोज व आलेख- सुजॉय चटर्जी


ओल्ड इस गोल्ड यानी जो पुराना है वो सोना है, ये कहावत किसी अन्य सन्दर्भ में सही हो या न हो, हिन्दी फ़िल्म संगीत के विषय में एकदम सटीक है. ये शृंखला एक कोशिश है उन अनमोल मोतियों को एक माला में पिरोने की. रोज शाम 6-7 के बीच आवाज़ पर हम आपको सुनवाते हैं, गुज़रे दिनों का एक चुनिंदा गीत और थोडी बहुत चर्चा भी करेंगे उस ख़ास गीत से जुड़ी हुई कुछ बातों की. यहाँ आपके होस्ट होंगे आवाज़ के बहुत पुराने साथी और संगीत सफर के हमसफ़र सुजॉय चटर्जी. तो रोज शाम अवश्य पधारें आवाज़ की इस महफिल में और सुनें कुछ बेमिसाल सदाबहार नग्में.

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9 श्रोताओं का कहना है :

indu puri का कहना है कि -

aaj bhi ek jagaha jaanaa hai jaldi se bata detii hoon ki geet hai-
tu mera chand main teri chandani
main tera rag tu meri ragini
baki to aane ke baada dekhungii

kahan ho veer ji
javaba sahi hai ki nahin bata dena

बी एस पाबला का कहना है कि -

लो जी, उत्तर तो पहले ही आ गया :-(
अब फिल्म का नाम ही बता देते हैं

दिल्लगी (1949)

शरद तैलंग का कहना है कि -

वैसे यदि इस गीत की बात करें तो इस गीत को दो गायिकाओं ने युगल रूप में नहीं गाया वरन एक में गीता दत्त ने गाया है दूसरा सुरैया तथा श्याम ने ।

Sujoy Chatterjee का कहना है कि -

"tu mera chaand main teri chaandni" OIG par pehle hi baj chuka hai...

सजीव सारथी का कहना है कि -

PAR SHARAD JI ABHI FAISALAKAHAN HUA KI KI GEET SAHI HAI :), SOOTRON SE PAKADIYE,HAM DO GAYIKAAON KE YUGAL GEET HI BAJA RAHE HAIN

संगीता पुरी का कहना है कि -

तू मेरा चांद मैं तेरी चांदनी .. बहुत बढिया लगा ये गीत !!

शरद तैलंग का कहना है कि -

सुजॊय जी
मुझे पता है कि गीत ये नहीं है मेरा पोस्ट इन्दु जी और पावला जी के लिए था । एक तुक्का लगा देता हूँ : गीत के बोल हैं :- मेरे चाँद मेरे लाल,तू जिए हज़ारों साल

Sujoy Chatterjee का कहना है कि -

abhi tak sahi jawaab nahi aaya hai... aur zara koshish keejiye.
Hint: isi film se Shaqeel aur Naushad ki jodi bani thi.

शरद तैलंग का कहना है कि -

नौशाद और शकील की जोडी तो फ़िल्म दर्द में बनी थी

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