रेडियो प्लेबैक वार्षिक टॉप टेन - क्रिसमस और नव वर्ष की शुभकामनाओं सहित


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प्लेबैक की टीम और श्रोताओं द्वारा चुने गए वर्ष के टॉप १० गीतों को सुनिए एक के बाद एक. इन गीतों के आलावा भी कुछ गीतों का जिक्र जरूरी है, जो इन टॉप १० गीतों को जबरदस्त टक्कर देने में कामियाब रहे. ये हैं - "धिन का चिका (रेड्डी)", "ऊह ला ला (द डर्टी पिक्चर)", "छम्मक छल्लो (आर ए वन)", "हर घर के कोने में (मेमोरीस इन मार्च)", "चढा दे रंग (यमला पगला दीवाना)", "बोझिल से (आई ऍम)", "लाईफ बहुत सिंपल है (स्टैनले का डब्बा)", और "फकीरा (साउंड ट्रेक)". इन सभी गीतों के रचनाकारों को भी प्लेबैक इंडिया की बधाईयां

Saturday, May 15, 2010

हास्य गीतों की परंपरा को भी बखूबी निभाया है पीढ़ी दर पीढ़ी संगीतकारों -गीतकारों ने



ओल्ड इस गोल्ड /रिवाइवल # २५

ज कल्याणजी-आनंदजी के गीत की बारी। फ़िल्म 'कसौटी' में प्राण साहब पर फ़िल्माया गया था किशोर कुमार का नेपाली अंदाज़ में गाया हुआ एक बेहद लोकप्रिय हास्य गीत "हम बोलेगा तो बोलोगे के बोलता है"। क्योंकि बात हास्य गीत की हो रही है और आप यह भी जानते होंगे कि कल्याणजी भाई का कैसा ज़बरदस्त 'सेन्स ऒफ़ ह्युमर' हुआ करता था। तो चलिए यह गीत सुनने से पहले कल्याणजी के कहे कुछ शब्द हो जाए, जिनसे उनके इस सेन्स ऒफ़ ह्युमर का एक छोटा सा नमूना आपके सामने प्रस्तुत हो जाएगा। कल्याणजी भाई कहते हैं (सौजन्य: विविध भारती): "यह ह्युमर का सबजेक्ट निकल आया है तो मैं कहूँगा कि ह्युमर को मैं बहुत महत्व देता हूँ। क्या है कि जहाँ हम जाएँ लोग हँसते नहीं, तो इसमें सब से ज़्यादा अगर किसी ने मुझे इन्स्पायर किया तो वो हैं आचार्य रजनीश जी, यानी कि ओशो। उन्होने मुझे बोला था कि 'कल्याणजी, आप का जो आर्ट है, उसको आप डेवेलप कीजिए, वह कमाल का आर्ट है। तो उन्होने मुझे बहुत इन्स्पायर किया। जब फ़िल्म बनी थी 'नन्हा फ़रिश्ता', तो वह मद्रास की पहली फ़िल्म थी हमारी। तो वहाँ पे स्टोरी राइटर बहुत सीरियस स्टोरी सुना रहा था कि हमारी स्टोरी में यह है, वह है, उसने लास्ट में बोला कि एक लोरी आती है, पिक्चर में वह बेस्ट, एक लोरी, लोरी, लोरी, अच्छा बनाना, बस एक लोरी बनाना। तो वो इतनी बार लोरी लोरी करने लगा कि मैंने ऐसे ही बोला कि 'हमारे तो ऒर्डिनरी गाने में ही लोग सो जाते हैं, लोरी में तो हम जान लड़ा देंगे। वो मद्रास के थे, वो तो समझे नहीं, बाद में किसी ने उनको समझाया कि ये मज़ाक कर रहे हैं।" दोस्तों, कल्याणजी के ये मज़ेदार किस्से और चुटकुले आगे भी 'ओल्ड इज़ गोल्ड' पर जारी रहेंगे, अगर आज मैंने ज़्यादा बातें की तो हो सकता है कि आप भी शायद यही बोलोगे के बोलता है। इसलिए हम और 'कु्श' नहीं बोलेगा।

ओल्ड इस गोल्ड एक ऐसी शृंखला जिसने अंतरजाल पर ४०० शानदार एपिसोड पूरे कर एक नया रिकॉर्ड बनाया. हिंदी फिल्मों के ये सदाबहार ओल्ड गोल्ड नगमें जब भी रेडियो/ टेलीविज़न या फिर ओल्ड इस गोल्ड जैसे मंचों से आपके कानों तक पहुँचते हैं तो इनका जादू आपके दिलो जेहन पर चढ कर बोलने लगता है. आपका भी मन कर उठता है न कुछ गुनगुनाने को ?, कुछ लोग बाथरूम तक सीमित रह जाते हैं तो कुछ माईक उठा कर गाने की हिम्मत जुटा लेते हैं, गुजरे दिनों के उन महान फनकारों की कलात्मक ऊर्जा को स्वरांजली दे रहे हैं, आज के युग के कुछ अमेच्युर तो कुछ सधे हुए कलाकार. तो सुनिए आज का कवर संस्करण

गीत -हम बोलेगा तो...
कवर गायन - हेमंत बदया




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हेमंत बदया
हेमंत एक संगीतमय परिवार से हैं. बैंगलोर के श्री लक्ष्मी केशवा से इन्होने ललित संगीत और पंडित परमेश्वर हेगड़े से हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत के गुर सीखे. टोरोंटो में रहने वाले हेमंत जी टीवी के अन्ताक्षरी और मस्त मस्त शोस में शान के साथ नज़र आये और कन्नडा संघ आईडल भी बने


विशेष सूचना -'ओल्ड इज़ गोल्ड' शृंखला के बारे में आप अपने विचार, अपने सुझाव, अपनी फ़रमाइशें, अपनी शिकायतें, टिप्पणी के अलावा 'ओल्ड इज़ गोल्ड' के नए ई-मेल पते oig@hindyugm.com पर ज़रूर लिख भेजें।

खोज व आलेख- सुजॉय चटर्जी



ओल्ड इस गोल्ड के ४०० शानदार एपिसोड आप सब के सहयोग और निरंतर मिलती प्रेरणा से संभव हुए. इस लंबे सफर में कुछ साथी व्यस्तता के चलते कभी साथ नहीं चल पाए तो कुछ हमसे जुड़े बहुत आगे चलकर. इन दिनों हम इन्हीं बीते ४०० एपिसोडों के कुछ चर्चित अंश आपके लिए प्रस्तुत कर रहे हैं इस रीवायिवल सीरीस में, ताकि आप सब जो किन्हीं कारणों वश इस आयोजन के कुछ अंश मिस कर गए वो इस मिनी केप्सूल में उनका आनंद उठा सकें. नयी कड़ियों के साथ हम जल्द ही वापस लौटेंगें

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2 श्रोताओं का कहना है :

mrityunjay kumar rai का कहना है कि -

nice


http://qsba.blogspot.com/


http://madhavrai.blogspot.com/

ANIL का कहना है कि -

Kya inko download bhi kar sakte ahi mujhe bahut hi pasand hai OLD IS GOLD

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