रेडियो प्लेबैक वार्षिक टॉप टेन - क्रिसमस और नव वर्ष की शुभकामनाओं सहित


ComScore
प्लेबैक की टीम और श्रोताओं द्वारा चुने गए वर्ष के टॉप १० गीतों को सुनिए एक के बाद एक. इन गीतों के आलावा भी कुछ गीतों का जिक्र जरूरी है, जो इन टॉप १० गीतों को जबरदस्त टक्कर देने में कामियाब रहे. ये हैं - "धिन का चिका (रेड्डी)", "ऊह ला ला (द डर्टी पिक्चर)", "छम्मक छल्लो (आर ए वन)", "हर घर के कोने में (मेमोरीस इन मार्च)", "चढा दे रंग (यमला पगला दीवाना)", "बोझिल से (आई ऍम)", "लाईफ बहुत सिंपल है (स्टैनले का डब्बा)", और "फकीरा (साउंड ट्रेक)". इन सभी गीतों के रचनाकारों को भी प्लेबैक इंडिया की बधाईयां

Monday, May 3, 2010

मादक गीतों में जब घुलती थी आशा की नशीली आवाज़ तो रवानगी कुछ और ही होती थी



ओल्ड इस गोल्ड /रिवाइवल # १३

क्योंकि आज रिवाइवल हो रहा है एक ऐसे गीत का जो उपज है आशा भोसले, ओ.पी. नय्यर और मजरूह सुल्तानपुरी के तिकड़ी की, तो यह गीत सुनवाने से पहले हो जाए कुछ बातें नय्यर साहब से जुड़ी हुई! 'ओल्ड इज़ गोल्ड' की कड़ी नंबर ३२४ में नय्यर साहब से की गई विविध भारती टीम के मुलाक़ात का अंश हमने प्रस्तुत किया था। आज उसी का दोहराव...

अहमद वसी: वक़्त चलता हुआ, चलता हुआ, कभी ना कभी आपको इस उमर पे लाता होगा जहाँ यह गुज़रा हुआ ज़माना जो है, ये गरदिशें जो हैं, ये अक्सर परछाइयाँ बन के चलती रहती हैं। तो क्या आप समझते हैं कि जो वक़्त गुज़रा वो बड़ा सुनहरा वक़्त था?

ओ. पी. नय्यर: वसी साहब, एक तो मैंने आप से अर्ज़ की कि मेरी ज़िंदगी का 'aim and inspiration have been an woman'. अगर उसके अंदर ७०% स्वीट मिली है तो बाक़ी के ३०% अगर मिर्ची भी लगी है तो ३०% मिर्ची में क्यों चिल्लाते हो बेटा, 'you have enjoyed your life, I have loved you, what else do you want'

यूनुस ख़ान: नय्यर साहब, जब आपकी युवावस्था के दिन थे, जब आप कुछ करना चाह रहे थे, तो आपके अंदर का एक अकेलापन ज़रूर रहा होगा आपकी जवानी के दिनों में।

नय्यर: मैं बार बार कई दफ़ा बता चुका हूँ कि मैं सड़कों पे अकेला रोया करता था 'alone in the nights and for no reason'। एक दफ़ा तो हमको मार पड़ी, मैंने बोला हम आपके बेटे ही नहीं हैं, मेरे माँ बाप तो कोई और हैं। बहुत पिटाई हुई, 'But they could not understand the loneliness in me'। हमने धोखा खाया तो पुरुषों से खाया है, औरतों ने धोखा नही दिया है। मेरी ज़िंदगी में कई औरतें रहीं जिनके साथ बड़ा मेरा दिल खोल के बात होती थी, और वो 'this was about when I was 19 years old'। लाहोर में। मैंने उसको २१.५ बरस तक छोड़ा। बड़े हसीन दिन थे वो, क्योंकि एक तो मुझे लाहोर शहर पसंद था, और मेरी जो 'romantic life' शुरु हुई वो लाहोर से हुई।

कमल शर्मा: आपकी जो शादी थी वो अरेन्ज्ड थी या...

नय्यर: 'that was a love marriage'।

यूनुस: नय्यर साहब, बात लाहोर की चल रही थी, आप ने कहा आपकी 'romantic life' वहाँ से शुरु हुई, किस तरह से आप मिलते थे और किस तरह से अपनी बातें करते थे?

नय्यर: यूनुस साहब, पब्लिक में थोड़े मिलेंगे! हम तो कोना ढ़ूंढते थे कि अलग जगह बैठ के बातें करने का मौका मिले। या उसी लड़की के घर ही चले जाते थे।

यूनुस: आप ने कभी किसी को प्रेम पत्र लिखा?

नय्यर: कमाल है कि मेरे पास चिट्ठियाँ रहीं, पर मैं चिट्ठियाँ लिखने के लिए 'I feel bored'. जो कुछ कहना था अपने ज़बान से कह दिया जी।

ओल्ड इस गोल्ड एक ऐसी शृंखला जिसने अंतरजाल पर ४०० शानदार एपिसोड पूरे कर एक नया रिकॉर्ड बनाया. हिंदी फिल्मों के ये सदाबहार ओल्ड गोल्ड नगमें जब भी रेडियो/ टेलीविज़न या फिर ओल्ड इस गोल्ड जैसे मंचों से आपके कानों तक पहुँचते हैं तो इनका जादू आपके दिलो जेहन पर चढ कर बोलने लगता है. आपका भी मन कर उठता है न कुछ गुनगुनाने को ?, कुछ लोग बाथरूम तक सीमित रह जाते हैं तो कुछ माईक उठा कर गाने की हिम्मत जुटा लेते हैं, गुजरे दिनों के उन महान फनकारों की कलात्मक ऊर्जा को स्वरांजली दे रहे हैं, आज के युग के कुछ अमेच्युर तो कुछ सधे हुए कलाकार. तो सुनिए आज का कवर संस्करण

गीत - ये है रेशमी जुल्फों का अँधेरा...
कवर गायन - कुहू गुप्ता




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कुहू गुप्ता
कुहू गुप्ता पेशे से पुणे में कार्यरत एक सॉफ्टवेर इंजिनियर हैं लेकिन इनका संगीत के साथ लगाव बचपन से ही रहा है. कहा जा सकता है कि इन्हें भगवान ने एक मधुर आवाज़ से नवांजा है और इनकी कोशिश यही है कि अपनी गायकी को हर दिन बेहतर बनाती जाएँ. इन्होने हिन्दुस्तानी शाश्त्रीय संगीत कि शिक्षा ११ साल की उम्र से शुरू की और ४ साल तक सीखा. ज़ी टीवी के मशहूर प्रोग्राम सारेगामापा में ये २ बार अपनी गायकी दिखा चुकी हैं. इन्होने कुछ मूल रचनाएँ भी गई हैं, जिनमे से एक हिंद युग्म के काव्य नाद एल्बम का हिस्सा है और कुछ व्यावसायिक तौर पर इस्तेमाल हुई हैं. इनके गाये हुए हिन्दी फिल्मों के गानों के कवर्स आज कल इन्टरनेट डेक्कन रेडियो पर भी सुनाये जा रहे हैं. इन सब के साथ साथ ये स्टेज शोव्स भी करती हैं.


विशेष सूचना -'ओल्ड इज़ गोल्ड' शृंखला के बारे में आप अपने विचार, अपने सुझाव, अपनी फ़रमाइशें, अपनी शिकायतें, टिप्पणी के अलावा 'ओल्ड इज़ गोल्ड' के नए ई-मेल पते oig@hindyugm.com पर ज़रूर लिख भेजें।

खोज व आलेख- सुजॉय चटर्जी



ओल्ड इस गोल्ड के ४०० शानदार एपिसोड आप सब के सहयोग और निरंतर मिलती प्रेरणा से संभव हुए. इस लंबे सफर में कुछ साथी व्यस्तता के चलते कभी साथ नहीं चल पाए तो कुछ हमसे जुड़े बहुत आगे चलकर. इन दिनों हम इन्हीं बीते ४०० एपिसोडों के कुछ चर्चित अंश आपके लिए प्रस्तुत कर रहे हैं इस रीवायिवल सीरीस में, ताकि आप सब जो किन्हीं कारणों वश इस आयोजन के कुछ अंश मिस कर गए वो इस मिनी केप्सूल में उनका आनंद उठा सकें. नयी कड़ियों के साथ हम जल्द ही वापस लौटेंगें

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3 श्रोताओं का कहना है :

bhArtiya Nagrik का कहना है कि -

would u please like to upload original song with cover version..

Sujoy Chatterjee का कहना है कि -

Hi,

You would be able to listen to original songs from 7th June onwards. As this is a 'Revival' series, we do not want to mix original & cover versions. We do not want that in this revival series, any kind of compariosn between the original & the cover version is done.

Regards,
Sujoy

AVADH का कहना है कि -

Dear Sujoy,
While I understand the reason of the desire of 'Bhartiya Nagrik', I am in total agreement with your views why this revival series will be only about the cover versions sung as expression of dedication to old maestros by the young,upcoming/ emerging, and, in many cases, latent talents.
Any comparison with the golden voices of yore may not be very fair to the new singers.
Avadh Lal

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