रेडियो प्लेबैक वार्षिक टॉप टेन - क्रिसमस और नव वर्ष की शुभकामनाओं सहित


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प्लेबैक की टीम और श्रोताओं द्वारा चुने गए वर्ष के टॉप १० गीतों को सुनिए एक के बाद एक. इन गीतों के आलावा भी कुछ गीतों का जिक्र जरूरी है, जो इन टॉप १० गीतों को जबरदस्त टक्कर देने में कामियाब रहे. ये हैं - "धिन का चिका (रेड्डी)", "ऊह ला ला (द डर्टी पिक्चर)", "छम्मक छल्लो (आर ए वन)", "हर घर के कोने में (मेमोरीस इन मार्च)", "चढा दे रंग (यमला पगला दीवाना)", "बोझिल से (आई ऍम)", "लाईफ बहुत सिंपल है (स्टैनले का डब्बा)", और "फकीरा (साउंड ट्रेक)". इन सभी गीतों के रचनाकारों को भी प्लेबैक इंडिया की बधाईयां

Tuesday, September 30, 2008

मिलिए ग़ज़ल गायकी की नई मिसाल रफ़ीक़ शेख से



कर्नाटक के बेलगाम जिले में जन्मे रफ़ीक़ शेख ने मरहूम मोहम्मद हुसैन खान (पुणे)की शागिर्दी में शास्त्रीय गायन सीखा तत्पश्चात दिल्ली आए पंडित जय दयाल के शिष्य बनें. मखमली आवाज़ के मालिक रफ़ीक़ के संगीत सफर की शुरुवात कन्नड़ फिल्मों में गायन के साथ हुई, पर उर्दू भाषा से लगाव और ग़ज़ल गायकी के शौक ने मुंबई पहुँचा दिया जहाँ बतौर बैंक मैनेजर काम करते हुए रफ़ीक़ को सानिध्य मिला गीतकार /शायर असद भोपाली का जिन्होंने उन्हें उर्दू की बारीकियों से वाकिफ करवाया. संगीत और शायरी का जनून ऐसा छाया कि नौकरी छोड़ रफ़ीक़ ने संगीत को अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया.

आज रफ़ीक़ पूरे भारत में अपने शो कर चुके हैं. वो जहाँ भी गए सुनने वालों ने उन्हें सर आँखों पर बिठाया. २००४ में औरंगाबाद में हुए अखिल भारतीय मराठी ग़ज़ल कांफ्रेंस में उन्होंने अपनी मराठी ग़ज़लों से समां बाँध दिया, भाषा चाहे कन्नड़ हो, हिन्दी, मराठी या उर्दू रफ़ीक़ जानते हैं शायरी /कविता का मर्म और अपनी आवाज़ के ढाल कर उसे इस तरह प्रस्तुत करते हैं कि सुनने वालों पर जादू सा चल जाता है, महान शायर अहमद फ़राज़ को दी गई अपनी दो श्रद्धांजली स्वरुप ग़ज़लों को सुनने के बाद आवाज़ के श्रोताओं ने भी इस बात को महसूस किया. हिंद युग्म पर मिली इस सफलता ने रफ़ीक़ को प्रेरित किया कि हिन्दी/उर्दू ग़ज़लों के एक एल्बम पर काम शुरू करें.


आल इंडिया रेडियो द्वारा सत्यापित कलाकार रफ़ीक़ चंदन टी वी और डी डी ०१ पर लाइव परफॉर्मेंस दे चुके हैं.अब तक उनकी एक मराठी एल्बम 'पाउस पहिला" और एक कन्नड़ एल्बम "नेने" बाज़ार में धूम मचा चुकी है. लता मंगेशकर और आशा भोंसले जैसे दिग्गजों के साथ गाने का इन्हे मौका मिला है जिसे रफ़ीक़ अपने जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि मानते हैं.

हिंद युग्म से जुड़ कर रफ़ीक़ बेहद खुश हैं, उन्हें विश्वास है युग्म के साथ उन्हें अपने पहले उर्दू ग़ज़ल एल्बम के सपने को साकार करने में मददगार साबित होगा. बीते शुक्रवार आवाज़ पर ओपन हुई उनकी ग़ज़ल "सच बोलता है" बेहद सराही गई. युग्म परिवार इस बेहद प्रतिभाशाली और संगीत के प्रति समर्पित कलाकार को अपनी समस्त शुभकामनायें दे रहा है. रफ़ीक़ जल्दी ही कमियाबी की नई मंजिलें पायें, इसी कामना के साथ आईये एक बार फ़िर सुनें उनकी बारीक, सुरीली और सधी हुई आवाज़ में उन्ही के द्वारा स्वरबद्ध ये शानदार ग़ज़ल.

(सुनने के लिए नीचे के पोस्टर पर क्लिक करें. इस नए उभरते कलाकार को अपना प्रोत्साहन अवश्य दें)




आप भी इसका इस्तेमाल करें

देखिये रफ़ीक़ शेख का सफर इन चित्रों में -
(आशा जी के साथ रफ़ीक़)


(बप्पी लहरी के साथ)


(संगीतकार राम लक्ष्मण के साथ)


(और ये हैं आज के रफ़ीक़)

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आप हिन्दी की सेवा कर रहे हैं, इसके लिए साधुवाद। हिन्दुस्तानी एकेडेमी से जुड़कर अपना सक्रिय सहयोग करें।

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सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्रयम्बके गौरि नारायणी नमोस्तुते॥


शारदीय नवरात्रारम्भ पर हार्दिक शुभकामनाएं!
(हिन्दुस्तानी एकेडेमी)
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हिन्दुस्तानी एकेडेमी का कहना है कि -

आप हिन्दी की सेवा कर रहे हैं, इसके लिए साधुवाद। हिन्दुस्तानी एकेडेमी से जुड़कर हिन्दी के उन्नयन में अपना सक्रिय सहयोग करें।

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सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्रयम्बके गौरि नारायणी नमोस्तुते॥


शारदीय नवरात्रारम्भ पर हार्दिक शुभकामनाएं!
(हिन्दुस्तानी एकेडेमी)
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