रेडियो प्लेबैक वार्षिक टॉप टेन - क्रिसमस और नव वर्ष की शुभकामनाओं सहित


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प्लेबैक की टीम और श्रोताओं द्वारा चुने गए वर्ष के टॉप १० गीतों को सुनिए एक के बाद एक. इन गीतों के आलावा भी कुछ गीतों का जिक्र जरूरी है, जो इन टॉप १० गीतों को जबरदस्त टक्कर देने में कामियाब रहे. ये हैं - "धिन का चिका (रेड्डी)", "ऊह ला ला (द डर्टी पिक्चर)", "छम्मक छल्लो (आर ए वन)", "हर घर के कोने में (मेमोरीस इन मार्च)", "चढा दे रंग (यमला पगला दीवाना)", "बोझिल से (आई ऍम)", "लाईफ बहुत सिंपल है (स्टैनले का डब्बा)", और "फकीरा (साउंड ट्रेक)". इन सभी गीतों के रचनाकारों को भी प्लेबैक इंडिया की बधाईयां

Monday, November 23, 2009

ए री मैं तो प्रेम दीवानी....मीरा के रंग रंगी गीता दत्त की आवाज़



ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 271

२३ नवंबर १९३०। स्थान बंगाल का फ़रीदपुर, जो आज बंगलादेश का हिस्सा है। एक ज़मीनदार परिवार में जन्म हुआ था एक बच्ची का। १९४२ के आसपास वो परिवार साम्प्रदायिक दंगों से अपने आप को बचते बचाते आ पहुँची बम्बई नगरी। लाखों की सम्पत्ति और ज़मीन जायदाद को युंही छोड़कर बम्बई आ पहुँचे इस परिवार ने दो कमरे का एक मकान भाड़े पर लिया। गायन प्रतिभा होने की वजह से यह बच्ची हीरेन्द्रनाथ नंदी से संगीत की तालीम ले रही थी। दिन गुज़रते गए और यह बच्ची भी बड़ी होती गई। १६ वर्ष की आयु में एक रोज़ यह लड़की अपने घर पर रियाज़ कर रही थी जब उसके घर के नीचे से गुज़र रहे थे फ़िल्म संगीतकार पंडित हनुमान प्रसाद। उसकी गायन और आवाज़ से वो इतने प्रभावित हुए कि वो कौतुहल वश सीधे उसके घर में जा पहुँचे। पंडित हनुमान प्रसाद से उसकी यह मुलाक़ात उसकी क़िस्मत को हमेशा हमेशा के लिए बदलकर रख दी। पंडित प्रसाद ने फ़िल्म 'भक्त प्रह्लाद' में इस लड़की को पहला मौका दिया और इस तरह से फ़िल्म जगत को मिली एक लाजवाब पार्श्व गायिका के रूप में गीता रॉय, जो आगे चलकर गीता दत्त के नाम से मशहूर हुईं। दोस्तों, आज २३ नवंबर, गीता जी के जनम दिवस के उपलक्ष पर हम 'ओल्ड इज़ गोल्ड' पर शुरु कर रहे हैं दस कड़ियों की एक ख़ास लघु शृंखला 'गीतांजली'। गीता दत्त के चाहने वालो की जब बात चलती है, तो इंटरनेट से जुड़े संगीत रसिकों को सब से पहले जिस शख्स का नाम याद आता है वो हैं हमारे अतिपरिचित पराग सांकला जी। गीता जी के गीतों के प्रति उनका प्रेम, जुनून और शोध सराहनीय रहा है। और इसीलिए प्रस्तुत शृंखला के लिए उनसे बेहतर भला और कौन होता जो गीता जी के गाए १० गानें चुनें और उनसे संबंधित जानकारियाँ भी हमें उपलब्ध कराएँ। और उन्होने बहुत ही आग्रह के साथ हमारे इस अनुरोध को ठीक वैसे ही पूरा किया जैसा हमने चाहा था। तो आज से अगले दस दिनों तक हम सुनेंगे पराग जी के चुने हुए गीता जी के गाए १० ऐसे गानें जो फ़िल्माए गये हैं सुनहरे दौर के दस अलग अलग अभिनेत्रियों पर। इस पूरी शृंखला के लिए शोध कार्य पराग जी ने ही किया है, हमने तो बस उनके द्वारा उपलब्ध कराई हुई जानकारी का हिंदी में अनुवाद किया है।

जब गीता रॉय शुरु शुरु में आईं थीं तो उन्होने कई फ़िल्मों में भक्ति रचनाएँ गाईं थीं। उनकी आवाज़ में भक्ति गीत इतने पुर-असर हुआ करते थे कि उन रचनाओं को सुनते हुए ऐसा लगता था कि जैसे ईश्वर से सम्पर्क स्थापित हो रहा हो! तो क्यों ना हम 'गीतांजली' की शुरुआत एक भक्ति रचना के साथ ही करें। और ऐसे में १९५० की फ़िल्म 'जोगन' का ज़िक्र करना अनिवार्य हो जाता है। जी हाँ, आज गीता जी की आवाज़ सज रही है नरगिस के होंठों पर। रणजीत मूवीटोन की इस फ़िल्म का निर्देशन किया था किदार शर्मा ने और नायक बने दिलीप कुमार। संगीतकार बुलो सी. रानी के करीयर की सब से चर्चित फ़िल्म रही 'जोगन' जिसमें उन्होने एक से एक मीरा भजन स्वरबद्ध किए जो गीता जी की आवाज़ पाकर धन्य हो गए। "घूंघट के पट खोल रे", "मत जा मत जा जोगी", "ए री मैं तो प्रेम दीवानी", "प्यारे दर्शन दीजो आए" और "मैं तो गिरिधर के घर जाऊँ" जैसे मीरा भजन एक बार फिर से जीवित हो उठे। मीरा भजनों के अतिरिक्त इस फ़िल्म में किदार शर्मा, पंडित इंद्र और हिम्मतराय शर्मा ने भी कुछ गीत लिखे। लेकिन आज हम सुनेंगे मीरा भजन "ए री मैं तो प्रेम दीवानी, मेरो दर्द ना जाने कोई"। पाठकों की जानकारी के लिए हम बता दें कि इस फ़िल्म का "मत जा जोगी" भजन गीता जी के पसंदीदा १० गीतों की फ़ेहरिस्त में शोभा पाता है जो उन्होने जारी किया था सन् १९५७ में। दोस्तों, क्योंकि आज गीता जी के साथ साथ ज़िक्र हो रहा है अभिनेत्री नरगिस जी का, तो उनके बारे में भी हम कुछ बताना चाहेंगे। नरगिस हिंदी सिनेमा के इतिहास का एक चमकता हुआ सितारा हैं जिन्होने सिनेमा के विकास में और सिनेमा को समृद्ध करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। १९३५ में बाल कलाकार के रूप में फ़िल्म 'तलाश-ए-हक़' में पहली बार नज़र आईं थीं, लेकिन उनका अभिनय का सफ़र सही मायने में शुरु हुआ सन् १९४२ में फ़िल्म 'तमन्ना' के साथ। ४० और ५० के दशकों में वो छाईं रहीं। युं तो वो एक डॊक्टर बनना चाहती थीं, लेकिन क़िस्मत उन्हे फ़िल्म जगत में ले आई। उनकी यादगार फ़िल्मों में शामिल है 'बरसात', 'अंदाज़', 'जोगन', 'आवारा', 'दीदार', 'श्री ४२०', 'चोरी चोरी' और इन सब से उपर १९५७ की फ़िल्म 'मदर इंडिया'। १९५८ में सुनिल दत्त से विवाह के पश्चात उन्होने अपना फ़िल्मी सफ़र समाप्त कर दिया और अपना पूरा ध्यान अपने परिवार पे लगा दिया। कैंसर की बीमारी ने उन्हे घेर लिया और ३ मई १९८१ को उन्होने इस संसार को अलविदा कह दिया। और इसके ठीक ५ दिन बाद, ७ मई १९८१ को प्रदर्शित हुई उनके बेटे संजय दत्त की पहली फ़िल्म 'रॉकी'। इस फ़िल्म के प्रीमीयर ईवेंट में एक सीट ख़ाली रखी गई थी नरगिस के लिए। और आइए अब सुनते हैं नरगिस पर फ़िल्माया गीता रॉय की आवाज़ में फ़िल्म 'जोगन' से यह मीरा भजन जिसे सुनते हुए आप एक दैवीय लोक में पहुँच जाएँगे। आज गीता जी के जनम दिवस पर हम हिंद-युग्म की तरफ़ से उन्हे अर्पित कर रहे हैं अपने विनम्र श्रद्धा सुमन!



और अब बूझिये ये पहेली. अंदाजा लगाइये कि हमारा अगला "ओल्ड इस गोल्ड" गीत कौन सा है. हम आपको देंगे तीन सूत्र उस गीत से जुड़े. ये परीक्षा है आपके फ़िल्म संगीत ज्ञान की. याद रहे सबसे पहले सही जवाब देने वाले विजेता को मिलेंगें 2 अंक और 25 सही जवाबों के बाद आपको मिलेगा मौका अपनी पसंद के 5 गीतों को पेश करने का ओल्ड इस गोल्ड पर सुजॉय के साथ. देखते हैं कौन बनेगा हमारा अगला (अब तक के चार गेस्ट होस्ट बने हैं शरद तैलंग जी (दो बार), स्वप्न मंजूषा जी, पूर्वी एस जी और पराग सांकला जी)"गेस्ट होस्ट".अगले गीत के लिए आपके तीन सूत्र ये हैं-

१. ये गीत है गीता जी का गाया मीना कुमारी के लिए.
२. गीतकार हैं अंजुम जयपुरी.
३. मुखड़े में शब्द है - "नस".इस पहेली को बूझने के आपको मिलेंगें २ की बजाय ३ अंक. यानी कि एक अंक का बोनस...पराग जी इस प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं ले सकेंगें.

पिछली पहेली का परिणाम -

नयी विजेता हमें मिली है इंदु जी के रूप में, इंदु जी आपका खता खुला है ३ अंकों से, बधाई, अवध जी आपने बहुत ही दिलचस्प बात बताई, क्या शांति माथुर के बारे में आपके पास और कोई जानकारी उपलब्ध है ? मतलब वो इन दिनों कहाँ है क्या कर रही हैं आदि, उनके बारे में हम सब बहुत कम जानते हैं...पाबला जी और निर्मला जी आभार..

खोज - पराग सांकला
आलेख- सुजॉय चटर्जी



ओल्ड इस गोल्ड यानी जो पुराना है वो सोना है, ये कहावत किसी अन्य सन्दर्भ में सही हो या न हो, हिन्दी फ़िल्म संगीत के विषय में एकदम सटीक है. ये शृंखला एक कोशिश है उन अनमोल मोतियों को एक माला में पिरोने की. रोज शाम 6-7 के बीच आवाज़ पर हम आपको सुनवाते हैं, गुज़रे दिनों का एक चुनिंदा गीत और थोडी बहुत चर्चा भी करेंगे उस ख़ास गीत से जुड़ी हुई कुछ बातों की. यहाँ आपके होस्ट होंगे आवाज़ के बहुत पुराने साथी और संगीत सफर के हमसफ़र सुजॉय चटर्जी. तो रोज शाम अवश्य पधारें आवाज़ की इस महफिल में और सुनें कुछ बेमिसाल सदाबहार नग्में.

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14 श्रोताओं का कहना है :

दिलीप कवठेकर का कहना है कि -

गीता जी नें दो गाने गाये हैं अंजुम जयपुरी के लिखे हुए:

अ. मोरे सैंय्यां,गोरी बैंय्या..

ब. आई बिरहा की रात..

मगर दोनों में नस शब्द नहीं है..

और धूंडता हूं..

निर्मला कपिला का कहना है कि -

बहुत सुन्दर भजन धन्यवाद्

indu का कहना है कि -

arre baba! agla hi prshn kathin de diya guruji aapne to ? itna kathin paper ? ek do clue aur de dijiye na ,itni cheatting to chlegi

Anonymous का कहना है कि -

film छू मंतर का गीत रात नशीली

दिलीप कवठेकर का कहना है कि -

फ़िल्म रात नशीली - छूमंतर का - ये Anonymous कैसे हो गया?

दिलीप कवठेकर

बी एस पाबला का कहना है कि -

छू मंतर का गीत रात नशीली
जां निसार अख्तर का लिखा हुआ है दिलीप जी

बी एस पाबला

RAJ SINH का कहना है कि -

अक्सर लेट हो जाने के कारन ,जबाब जानते हुए भी उत्तर पहले ही मिल चुके होते थे तो बाहर ही से निकल लेता था सिर्फ आलेख पढ़ और गीत सुन .

लेकिन इस बार ,गीता दत्त का दीवाना होने के बावजूद ,कुछ भी नहीं सूझ रहा .और कोई नहीं तो पराग जी तो हैं ही. कल तक इंतज़ार करूंगा .

रही बात जोगन की. इसे अनगिनत बार देख चूका हूँ.बाकी सब तो आलेख में आ ही गया है बस कथा पर ही कुछ कहूँगा .

अनुराग ,प्रेम ,प्रीती पर ,इतना अंतर्द्वंद लिए मैंने आज तक कोई फिल्म नहीं देखी. एक ' नास्तिक ' और एक कृस्न भक्त ' जोगन ' का आतंरिक अनुराग .एक गहन फलसफे में डूबी .

दिलीप और नर्गिस ने एक दूसरे को छूना तो दूर ,गजों फासले से बात की है . वह भी संछिप्त ही . एक दूसरे की आँखों में सीधे झांके बिना .
किदर शर्मा को मैं यह फिल्म उनका सर्वोत्तम दिक्दर्शन मानता हूँ और दिलीप और नर्गिस की अदाकारी का उच्चतम पड़ाव.
जिन्होंने यह फिल्म न देखी हो उनसे अनुरोध करूंगा , जरूर देखें.

एक आशा पाल कर चल रहा हूँ की 'प्यासा ' का ' आज सजन मोहे अंग लगालो.........' जरूर सुनने को मिलेगा , इन दस दिनों में .

आवाज़ टीम को सिर्फ बधाई कह देना मेरे लिए बहुत बड़ा अंडर स्टेटमेंट होगा .और कुछ क्या कहूं !

आलोक "साहिल" का कहना है कि -

बहुत दिनों बाद आज इस मयकदे में आना हो पाया...लेकिन नशा पहले की ही तरह...गीता दत्त जी ने तो आज मेरी इस रात को और भी मदहोश कर दिया...कहने को तो भजन लेकिन खनक ऐसी कि सीधे दिल में उतर जाए...बहुत ही उम्दा पेशकश....
आलोक साहिल

श्याम सखा 'श्याम' का कहना है कि -

हमारी यह पेशकश आपको पसंद आई?
bahut pasand aaayee

indu का कहना है कि -

sakhi ri mera nache mera tn nche ns ns me chhaya hai pyar

indu का कहना है कि -

गीता दत्त के द्वारा मीना कुमारी के लिए गाया गया गीत है
''सखी री मेरा मन नाचे
मेरा तन नाचे
नस नस मे छाया है प्यार ''
इंदु पुरी गोस्वामी
chittor गढ़ (राज)

indu का कहना है कि -

film 'nav durga' ......?
sirji! paper kthin tha ,bahut dimag lagana pada
film ka naam galat ho skta hai
gana to 200%sahi pahchan liya hai maine .isme ....ko...i...sh...q...n...hi

Parag का कहना है कि -

सुजॉय जी और सजीव जी को हार्दिक आभार इतनी सुन्दर प्रस्तुती के लिए. सभी संगीत प्रेमियोंमें गीता जी के प्रती आत्मीयता और स्नेह देखकर बहुत प्रसन्नता हुई.
निर्मला जी , दिलीप जी, इंदु जी, पाबला जी, राज सिंह जी, आलोक जी, श्याम जी : सभी से सादर विनती है की हमारा गीताजी को समर्पित जालस्थल (वेबसाईट) जरूर देखिएगा
पाबला जी, हमने आपको एक पत्र (ईमेल ) लिखा है. आपके जवाब का इंतज़ार रहेगा.
गीताजी को जन्मदिन की अनेक शुभकामनाएं. आप हम संगीत प्रेमियोंके दिलोंमें आज भी विराजमान है.

आभारी
पराग

AVADH का कहना है कि -

बहुत बहुत धन्यवाद पराग जी ,
यह कहने की कतई ज़रुरत नहीं है कि गीता जी के बारे में और उनकी हिंदी फिल्म संगीत उपलब्धि की जानकारी आपसे बेहतर कौन दे सकता है.
राज सिंह जी ने फिल्म 'जोगन' के सब पहलू उजागर कर दिए धन्यवाद.
मैं जानता हूँ कि ऐसा हो ही नहीं सकता कि उनकी (और मेरी भी ) पसंद का " आज सजन मुझे अंग लगा लो जनम सफल हो जाये " इस प्रोग्राम में न हो.
बस इंतज़ार रहेगा कि उसे पराग जी कब पोस्ट करते हैं.
सुजोय जी और सजीव जी का भी आभार जो हमारे आनंद के लिए इतना कुछ करते हैं.
आपसे एक गुज़ारिश है कि कभी परागजी और अन्य होस्ट्स कि बारी होने के बाद (या दौरान) अपनी सुविधा अनुसार रोशन द्वारा फिल्म नवबहार का भी " ऐ री, मैं तो ..." सुनवा दें.
आभार सहित,
अवध लाल

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