रेडियो प्लेबैक वार्षिक टॉप टेन - क्रिसमस और नव वर्ष की शुभकामनाओं सहित


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प्लेबैक की टीम और श्रोताओं द्वारा चुने गए वर्ष के टॉप १० गीतों को सुनिए एक के बाद एक. इन गीतों के आलावा भी कुछ गीतों का जिक्र जरूरी है, जो इन टॉप १० गीतों को जबरदस्त टक्कर देने में कामियाब रहे. ये हैं - "धिन का चिका (रेड्डी)", "ऊह ला ला (द डर्टी पिक्चर)", "छम्मक छल्लो (आर ए वन)", "हर घर के कोने में (मेमोरीस इन मार्च)", "चढा दे रंग (यमला पगला दीवाना)", "बोझिल से (आई ऍम)", "लाईफ बहुत सिंपल है (स्टैनले का डब्बा)", और "फकीरा (साउंड ट्रेक)". इन सभी गीतों के रचनाकारों को भी प्लेबैक इंडिया की बधाईयां

Wednesday, December 3, 2008

सुनिए सलिल दा के अन्तिम संगीत रचनायों में से एक, फ़िल्म "स्वामी विवेकानंद" के गीत



पिछले दिनों सलिल दा पे लिखी हमारी पोस्ट के जवाब में हमारे एक नियमित श्रोता ने हमसे गुजारिश की सलिल दा के अन्तिम दिनों में की गई फिल्मों में से एक "स्वामी विवेकानंद" के गीतों को उपलब्ध करवाने की. सलिल दा के अन्तिम दिनों में किए गए कामों की बहुत कम चर्चा हुई है. स्वामी के जीवन पर आधारित इस फ़िल्म में सलिल दा ने ८ गीत स्वरबद्ध किए. ख़ुद स्वामी के लिखे कुछ गीत हैं इसमें तो कबीर, जयदेव और सूरदास के बोलों को भी स्वरों का जामा पहनाया है सलिल दा ने.दो गीत गुलज़ार साहब ने लिखे हैं जिसमें के जे येसुदास का गाया बेहद खूबसूरत "चलो मन" भी शामिल है. गुलज़ार के ही लिखे एक और गीत "जाना है जाना है..." को अंतरा चौधरी ने अपनी आवाज़ दी है. अंतरा की आवाज़ में बहुत कम हिन्दी गीत सुनने को मिले हैं, इस वजह से भी ये गीत हमें बेहद दुर्लभ लगा. एक और विशेष बात इस फ़िल्म के बारे में ये है कि सलिल दा अपनी हर फ़िल्म का जिसमें भी वो संगीत देते थे, पार्श्व संगीत भी वो ख़ुद ही रचते थे. पर इस फ़िल्म के मुक्कमल होने से पहले ही दा हम सब को छोड़ कर चले गए. विजय भास्कर राव ने इस फ़िल्म का पार्श्व संगीत दिया. जानकारी के लिए बता दें कि "स्वामी विवेकानंद" के आलावा मात्र एक बांग्ला फ़िल्म है (रात्रि भोर) जिसमें सलिल दा गीतों को स्वरबद्ध करने के साथ साथ फ़िल्म के पार्श्व संगीत में अपना योगदान नही दिया. पार्श्व संगीत में उनका दखल भी इसी बात की तरफ़ इशारा करता है कि वो मुक्कमल "शो मैन" संगीतकार थे, जो दृश्य और श्रवण की बेमिसाल सिम्फनी रचते थे. इससे पहले कि हम आपको १९९४ में आई फ़िल्म "स्वामी विवेकानंद" के गीत सुनवायें आपको उनके द्वारा रचित एक "बेले" का संगीत सुनवाते हैं.


बेले का थीम है "बोटमेन ऑफ़ ईस्ट बंगाल", सचिन शंकर बेले यूनिट द्वारा १९७१ में रचित इस बेले में सलिल दा ने एक दुर्लभ गीत बनाया "दयानी करिबो अल्लाह रे" जिसे पंकज मित्रा ने अपनी महकती आवाज़ से सजाया. सलिल दा ने इस मधुर धुन को अपनी ही एक हिन्दी फ़िल्म लालबत्ती (१९५७) के गीत "क्या से क्या हो गए अल्लाह रे' से लिया था जिसे सलिल दा के बहुत गहरे मित्र और मशहूर लोक गायक निर्मालेंद्रू चौधरी ने गाया था. पर इस बेले के लिए उनका रचा ये गीत तो किसी और ही दुनिया का लगता है. सुनते हैं सलिल दा की सिम्फनी "दयानी करिबो अल्लाह रे..."




और अब सुनिए फ़िल्म "स्वामी विवेकानंद" से सलिल दे कुछ लाजवाब गीत -




प्रस्तुति सहयोग सलिल दा डॉट कॉम, सलिल दा के बारे में विस्तार से जानने के लिए यहाँ अवश्य जाएँ.


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6 श्रोताओं का कहना है :

अफ़लातून का कहना है कि -

सुन्दर प्रस्तुति । दुर्लभ गीत ।

neelam का कहना है कि -

i am listenning the songs of vivekanand ,really worth appriciating .sound quality is superb .this section is at it's peak ,congrates .

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन का कहना है कि -

"स्वामी विवेकानंद" के गीत जितना भी सुनें कम हैं, विशेषकर "न ही शूर्जो" का कोई जवाब नहीं! अनूप जलोटा के स्वर में भजन भी मनभावन है!

दिलीप कवठेकर का कहना है कि -

Why is it so that since last week, the player is not appearing on screen.So I am not fortunate enough to listen to this EXTRA TERRESTIAL MUSIC.

neelam का कहना है कि -

"chalo man jaaye ghar apne" ,i like this most,
rest of songs are also very melodious .nice efforts .we would like to listen these type of
compositions again and again ,thanks to whole team of aawaj.

तपन शर्मा का कहना है कि -

इन गीतों को दुर्लभ ही कहा जायेगा... मधुर संगीत..
आवाज़ का धन्यवाद..

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