रेडियो प्लेबैक वार्षिक टॉप टेन - क्रिसमस और नव वर्ष की शुभकामनाओं सहित


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प्लेबैक की टीम और श्रोताओं द्वारा चुने गए वर्ष के टॉप १० गीतों को सुनिए एक के बाद एक. इन गीतों के आलावा भी कुछ गीतों का जिक्र जरूरी है, जो इन टॉप १० गीतों को जबरदस्त टक्कर देने में कामियाब रहे. ये हैं - "धिन का चिका (रेड्डी)", "ऊह ला ला (द डर्टी पिक्चर)", "छम्मक छल्लो (आर ए वन)", "हर घर के कोने में (मेमोरीस इन मार्च)", "चढा दे रंग (यमला पगला दीवाना)", "बोझिल से (आई ऍम)", "लाईफ बहुत सिंपल है (स्टैनले का डब्बा)", और "फकीरा (साउंड ट्रेक)". इन सभी गीतों के रचनाकारों को भी प्लेबैक इंडिया की बधाईयां

Wednesday, July 29, 2009

छू लेने दो नाज़ुक होंठों को...राज कुमार का संजीदा अंदाज़ और रफी साहब की गलाकारी



ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 155

मोहम्मद रफ़ी पर केन्द्रित विशेष शृंखला 'दस चेहरे एक आवाज़' के लिए आज हम ने जिस चेहरे को चुना है, वो ज़्यादातर जाने जाते हैं अपने संवाद अदायगी के ख़ास अंदाज़ की वजह से। जी हाँ, ज़िक्र है राजकुमार साहब का। राजकुमार जैसे अभिनेताओं पर गानें नहीं फ़िल्माये जाते, उनकी संवाद अदायगी और अभिनय ही उनके निभाये किरदारों के केन्द्रबिंदु में रहे। लेकिन फिर भी कुछ फ़िल्मों में उन्होने परदे पर कुछ गानें भी गाये, और जिनमें से अधिकतर रफ़ी साहब की ही आवाज़ में थे। 'नीलकमल', 'हीर रांझा', और 'काजल' कुछ ऐसी ही फ़िल्में हैं। आज इनमें से सुनिये फ़िल्म 'काजल' का वह सदाबहार नग़मा जिसमें है अजीब सा एक नशा है जिसे सुनकर यकायक मन बहकने लगे, क़दम डगमागाने लगे। "छू लेने दो नाज़ुक होठों को, कुछ और नहीं है जाम है ये, कुदरत ने जो हमको बख़्शा है, वो सब से हसीं इनाम है ये"। सन्‍ १९६५ में बनी फ़िल्म 'काजल' का निर्माण व निर्देशन किया था राम महेश्वरी ने और राजकुमार के अलावा फ़िल्म के प्रमुख कलाकार थे मीना कुमारी और धर्मेन्द्र। कहानी गुल्शन नंदा की थी और पटकथा फणी मजुमदार का। गीतकार साहिर और संगीतकार रवि के गीत संगीत का भी बड़ा हाथ रहा फ़िल्म की कामयाबी में। प्रस्तुत गीत के अलावा रफ़ी साहब का गाया एक और गीत जो बड़ा ही मशहूर हुआ था वह है "ये ज़ुल्फ़ अगर खुल के बिखर जाये तो अच्छा"। आशा भोंसले की आवाज़ में "मेरे भ‍इया मेरे चंदा मेरे अनमोल रतन" और "तोरा मन दर्पण कहलाये" भी ख़ूब चले थे।

विविध भारती पर एक बार शायर व गीतकार साहिर लुधियानवी पर एक विश्लेषण सभा का आयोजन किया गया था जिसमे शरीक़ हुये थे संगीतकार रवि, शायर अहमद वसी, और विविध भारती के वरिष्ठ उद्‍घोषक रज़िया रागिनी व कमल शर्मा। उसमें फ़िल्म 'काजल' के प्रस्तुत गीत के बारे में रवि साहब ने कहा था - "फ़िल्म 'काजल' के 'प्रोड्युसर डिरेक्टर' ने साहिर साहब को कहा कि फ़िल्म में राजकुमार मीना कुमारी को शराब पीने के लिए ज़िद कर रहे हैं, इस 'सिचुयशन' पर दो शेर लिख दें। तो अगले दिन साहिर साहब दो शेर लिख कर ले आये, "छू लेने दो नाज़ुक होठों को, कुछ और नहीं है जाम है ये, कुदरत ने जो हमको बख़्शा है, वो सब से हसीं इनाम है ये"। मैने जब इस शेर को सुना तो मैने उनसे कहा कि 'इतना अच्छा लिखा है आप ने, इस का तो गाना बनना चाहिए'। लेकिन प्रोड्युसर साहब ने कहा कि 'राजकुमार साहब गाने वाने नहीं गायेंगे, वो कहाँ गाते हैं?' लेकिन मैने भी ज़िद नहीं छोड़ी और यह गीत बनकर रहा। रफ़ी साहब ने जब इसे गाया तो 'रिकॉर्डिंग' पर मौजूद सभी लोग वाह वाह कर उठे। और जब फ़िल्म के डिस्ट्रिब्युटरों ने यह गीत सुना तो कहने लगे कि 'इतने अच्छे गाने में बस दो ही शेर (दो अंतरे)?' तब लोगों ने साहिर साहब को चारों तरफ़ ढूँढा पर पूरे शहर में कहीं उनका पता न चल सका, और इस तरह से दो ही अंतरे इस गाने में रह गये।" तो दोस्तों, यह थी इस गीत के बनने की कहानी, अब वक़्त हो चुका है गीत को सुनने का, सुनिये...



और अब बूझिये ये पहेली. अंदाजा लगाइये कि हमारा अगला "ओल्ड इस गोल्ड" गीत कौन सा है. हम आपको देंगे तीन सूत्र उस गीत से जुड़े. ये परीक्षा है आपके फ़िल्म संगीत ज्ञान की. याद रहे सबसे पहले सही जवाब देने वाले विजेता को मिलेंगें 2 अंक और 25 सही जवाबों के बाद आपको मिलेगा मौका अपनी पसंद के 5 गीतों को पेश करने का ओल्ड इस गोल्ड पर सुजॉय के साथ. देखते हैं कौन बनेगा हमारा दूसरा (पहले गेस्ट होस्ट हमें मिल चुके हैं शरद तैलंग जी के रूप में)"गेस्ट होस्ट". अगले गीत के लिए आपके तीन सूत्र ये हैं-

1. बेहद खुशमिजाज़ अंदाज़ में गाया है रफी साहब ने इस गीत को.
2. कलाकार हैं -"शशि कपूर".
3. एक अंतरा खत्म होता है इन शब्दों पर -"जुल्फ लहराई".

सुनिए/ सुनाईये अपनी पसंद दुनिया को आवाज़ के संग -
गीतों से हमारे रिश्ते गहरे हैं, गीत हमारे संग हंसते हैं, रोते हैं, सुख दुःख के सब मौसम इन्हीं गीतों में बसते हैं. क्या कभी आपके साथ ऐसा नहीं होता कि किसी गीत को सुन याद आ जाए कोई भूला साथी, कुछ बीती बातें, कुछ खट्टे मीठे किस्से, या कोई ख़ास पल फिर से जिन्दा हो जाए आपकी यादों में. बाँटिये हम सब के साथ उन सुरीले पलों की यादों को. आप टिपण्णी के माध्यम से अपनी पसंद के गीत और उससे जुडी अपनी किसी ख़ास याद का ब्यौरा (कम से कम ५० शब्दों में) हम सब के साथ बाँट सकते हैं वैसे बेहतर होगा यदि आप अपने आलेख और गीत की फरमाईश को hindyugm@gmail.com पर भेजें. चुने हुए आलेख और गीत आपके नाम से प्रसारित होंगें हर माह के पहले और तीसरे रविवार को "रविवार सुबह की कॉफी" शृंखला के तहत. आलेख हिंदी या फिर रोमन में टंकित होने चाहिए. हिंदी में लिखना बेहद सरल है मदद के लिए यहाँ जाएँ. अधिक जानकारी ये लिए ये आलेख पढें.


पिछली पहेली का परिणाम -

अदा जी गलत जवाब, कोई बात नहीं हो जाता है कई बार, पर इसी बहाने एक नए विजेता से हमारा साक्षात्कार हुआ. किश या एरोशिक जो भी इनका नाम है उनको बधाई. २ अंक मिले आपको. दिलीप जी बहुत अच्छी जानकारी दी आपने, बाकी सभी श्रोताओं से भी अनुरोध है कि अपनी पसंद के गीत और लघु आलेख रक्षा बंधन वाले रविवार सुबह की कॉफी एपिसोड के लिए जल्दी भेजें

खोज और आलेख- सुजॉय चटर्जी



ओल्ड इस गोल्ड यानी जो पुराना है वो सोना है, ये कहावत किसी अन्य सन्दर्भ में सही हो या न हो, हिन्दी फ़िल्म संगीत के विषय में एकदम सटीक है. ये शृंखला एक कोशिश है उन अनमोल मोतियों को एक माला में पिरोने की. रोज शाम 6-7 के बीच आवाज़ पर हम आपको सुनवाते हैं, गुज़रे दिनों का एक चुनिंदा गीत और थोडी बहुत चर्चा भी करेंगे उस ख़ास गीत से जुड़ी हुई कुछ बातों की. यहाँ आपके होस्ट होंगे आवाज़ के बहुत पुराने साथी और संगीत सफर के हमसफ़र सुजॉय चटर्जी. तो रोज शाम अवश्य पधारें आवाज़ की इस महफिल में और सुनें कुछ बेमिसाल सदाबहार नग्में.

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14 श्रोताओं का कहना है :

शरद तैलंग का कहना है कि -

क्या हुआ? अभी तक गीत ढूंढ ही रहे है क्या सब लोग ? मैं तरस रहा हूँ जवाब देने के लिए ।

Disha का कहना है कि -

likhe jo khat tujhe

Disha का कहना है कि -

लिखे जो खत तुझे वो तेरि याद में हजारों रंग के नजारे बन गये
सवेरा जब हुआ तो फूल बन गये जो रात आयी तो सितारे बन गये

शरद तैलंग का कहना है कि -

अदा जी
मन्ज़िल के इतने करीब आ कर भी आपको क्या हो गया है ।

Disha का कहना है कि -

लिखे जो खत तुझे वो तेरि याद में हजारों रंग के नजारे बन गये
सवेरा जब हुआ तो फूल बन गये जो रात आयी तो सितारे बन गये
कोइ नग्मा कहीं गूँजा, कहा दिल ने ये तू आयी
कहीं चटकी कली कोइ, मैं ये समझा तू शरमायी
कोइ खुशबू कहीं बिखरी, लगा ये जुल्फ लहरायी
लिखे जो खत तुझे वो तेरि याद में हजारों रंग के नजारे बन गये
गायक- मोहम्मद रफी
गीतकार- नीरज
संगीत-शंकर जयकिशन
फिल्म- कन्यादान

sumit का कहना है कि -

अगर सिर्फ लहरायी शब्द होता तो मैं ये गाना लिखता दिल ने फिर याद किया बर्क़ सी लहरायी है


disha जी को सही जवाब के लिए बधाई

sumit का कहना है कि -

vaise मुझे ये नहीं पता दिल ने फिर याद........gaane में कौन सा hero है

'ada' का कहना है कि -

chalo ji ye to hona hi tha kaam se mujhe jana pada abhiaadhe ghante pahle aayi hun aur sab mamla ho chuka hai
Disha ji bahu bahut badhai..
Sharad ji aapko nahi maloom kitni dukhi hun main

Sumit ji
dil ne fir yaad kiya ko screen par gaya hai Dharmendra ne Nutan aur rehmaan ke saamne kashti par baith kar...

manu का कहना है कि -

तेरी खुशबू कहीं बिखरी लगा ये जुल्फ लहराई...

erohsik का कहना है कि -

likhe jo khat tujhe woh teri yaad mein hazaaron rang ke nazaaren ban gaye
Singer: Rafi
Film: Kanyadaan
Year: 1968
Music: Shankar-Jaikishan
Lyrics: Gopaldas Neeraj

Kish...

A.I.M. Team का कहना है कि -

likhe jo khat tujhe woh teri yaad mein hazaaron rang ke nazaaren ban gaye
Singer: Rafi
Film: Kanyadaan
Year: 1968
Music: Shankar-Jaikishan
Lyrics: Gopaldas Neeraj

erohsik का कहना है कि -

likhe jo khat tujhe woh teri yaad mein hazaaron rang ke nazaaren ban gaye
Singer: Rafi
Film: Kanyadaan
Year: 1968
Music: Shankar-Jaikishan
Lyrics: Gopaldas Neeraj

Manju Gupta का कहना है कि -

लिखे जो ख़त तुझे,तेरी याद में, ........

Shamikh Faraz का कहना है कि -

दिशा जी को सही जवाब के लिए मुबारकबाद.

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